शोहरतगढ़- शिवबाबा मंदिर परिसर में चले रहे सामूहिक रुद्राभिषेक कार्यक्रम में अनेको शिवभक्तो ने किया पूजन अर्चन, कथावाचक स्वामी सूर्यकांताचार्य जी महाराज ने कहा- श्रवण मास में शिव आराधना का है बड़ा महत्व!

शोहरतगढ़- शिवबाबा मंदिर परिसर में चले रहे सामूहिक रुद्राभिषेक कार्यक्रम में अनेको शिवभक्तो ने किया पूजन अर्चन, कथावाचक स्वामी सूर्यकांताचार्य जी महाराज ने कहा- श्रवण मास में शिव आराधना का है बड़ा महत्व!

पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

स्थानीय नगर पंचायत शोहरतगढ़ के शिवबाबा मंदिर पर आयोजित सामूहिक रुद्राभिषेक प्रात: काल अनेको शिव भक्तो ने पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक किया।

प्रत्येक दिन रात्रि में चल रहे कथा में अयोध्या धाम से पधारे स्वामी सूर्यकांताचार्य जी महाराज ने कथा में कहा कि वाष्कल नामक ग्राम के समस्त लोग पापी, स्वेच्छाचारी थे। इसी ग्राम में बिंदुक नाम का ब्राह्मण रहता था। उसने अपने पत्नी का त्याग करके वेश्याओं के साथ रमण करना शुरू कर दिया और उसकी पत्नी भी पर पुरुष के साथ संबंध बनाने लगी जब विंदुक को पता चला कि उसकी पत्नी किसी पुरुष के संसर्ग में है तो उसने अपनी पत्नी की पिटाई की परंतु बाद में उसने कहा कि ठीक है तुम पर पुरुष के संसर्ग में रहो लेकिन उनसे धन लिया करो और वह धन हमें दिया करो उसकी पत्नी वेश्यावृत्ति करने लगी। बाद में बिंदुक की मृत्यु हो गई जो अपने पाप कर्मों से विंध्याचल पर्वत के पिशाच हुआ। एक दिन बिंदुक की पत्नी चंचुला अपने सगे संबंधियों के साथ प्रयाग में घूमने गई जहां पर शिव महापुराण की कथा हो रही थी उसने कथा को सुना और अपने पाप कर्मों को याद करके रोने लगी तो कथा वक्ता ने उन्हें शिव की भक्ति एवं शिव महापुराण कथा श्रवण करने को कहा। शिव की आराधना के प्रभाव से वह निष्पाप हो करके शिवलोक को प्राप्त हुई। एक दिन चंचुला ने अपने पति के बारे में मैया पार्वती से पूछा तो पार्वती जी ने बताया कि तुम्हारा पति प्रेत बन करके विंध्याचल पर्वत से भ्रमण कर रहा है तो चंचुला ने उनके मुक्ति के लिए निवेदन किया। मैया पार्वती ने तुम्बुरु नाम के गंधर्व को भेजा। तुम्बुरू उस पिशाच को बांध करके शिव महापुराण की कथा सुनाई और इस कथा के प्रभाव से बिंदुक पैशाच योनि से मुक्त हो गया।

इस दौरान प्रमुख रूप से आचार्य राम प्रकाश दास, पंडित अमर वैदिक पंडित, पंकज मिश्रा, पंडित अजय पांडे, शिवपूजन वर्मा, शैलेंद्र कौशल, पप्पू बाबा, रज्जू बोरा, माधुरी मिश्रा आदि उपस्थित रहे।